कैसा नैनीताल
चारों
तरफ पहाड़ियों-जंगलों से घिरा..प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर..छोटी-बड़ी कई झीलें..ऐसा
है झीलों का शहर नैनीताल. आईए जानते हैं झीलों के इस शहर में क्या है आपके लिए
खास.. इस लेख में आपको केवल नैनीताल शहर के बारे में ही बताया जा रहा है..जिले में
स्थित अन्य झीलों के बारे में अगले लेख में पढ़ सकते हैं. क्योंकि पूरा नैनीताल
जिला कई प्राकृतिक खजानों से भरा पड़ा है।
नैनी झील
नैनीताल बस अड्डे पर
पहुंचते ही सबसे पहले आपकी नजर नैनी झील पर पड़ेगी. बस अड्डे के ठीक सामने दिखने
वाले झील के कोने को मल्लीताल कहते हैं. जबकि बस अड्डे की तरफ वाले कोने को तल्ली
ताल कहते हैं. मल्ली और तल्ली कुंमाऊंनी बोली के शब्द हैं. मल्ली का मतलब है ऊपरी
कोना. तल्ली का मतलब है निचला कोना. नैनीताल शहर झील के किनारे वाली विहंगम
पहाड़ियों में बसा है. नैनी झील में नाव की सवारी करने के दौरान दिखाई देते हे हरे
घने जंगल और ऊंची-ऊंची पहाड़ियां. झील से आप पूरे नैनीताल को एक नज़र में देख सकते
हैं. झील सात पहाड़ियों से घिरी है.
स्नो
व्यू
यह जगह शहर से 2.5 किलोमीटर की दूरी पर
है. अगर आप वॉक करने के शौकीन हैं, तो पहाड़ी घने हरे-भरे जंगल से होते हुए 30 से 40 मिनट में यहां तक
पहुंच जाते हैं. यहां से आप कुदरती सौंदर्य से सरोबार पहाड़ियों का मनमोहक दृश्य
दूरबीन से देख सकते हैं.
नैना पीक और चाइना
पीक
नैना पीक 2611 मीटर की ऊंचाई पर है
और यह शहर की सबसे ऊंची पहाड़ी है. यहां से आप हिमालय का बेहद खूबसूरत नजारा देख
सकते हैं. अगर मौसम साफ हुआ तो यहां से आप ग्रेट वॉल ऑफ चाइना के भी दर्शन कर सकते
हैं.ॉ
गर्नी
हाउस
पहले यह जिम कॉर्बेट
का घर था, जो आयरपाटा पहाड़ी
पर है. यहां एक म्यूजियम है, जिसमें जिम कॉर्बेट की तमाम चीजों को बहुत सहेजकर
रखा गया है.
सेंट
जॉन चर्च
1844 में बना ये चर्च मल्लीताल
में है. नैना देवी मंदिर से यह चर्च लगभग आधा मील की दूरी पर है.
टिफिन टॉप और डोरती
सीट
टिफिन टॉप से आप
हिमालय की खूबसूरत देख सकते हैं. इसे एक ब्रिटिश पेंटर महिला की याद में बनाया गया
है. इसे उनके हसबेंड ने उनकी मौत के बाद उनकी याद में तैयार करवाया था.
किलबरी
नैनीताल से 10 किलोमीटर की दूरी पर
है किलबरी. अगर आप शांति से प्राकृतिक वातावरण में छुट्टी मानने के इच्छुक हैं तो यह जगह आपके लिए है.
कैसे
पहुंचें
नैनीताल देश के प्रमुख
नगरों से रेल व बस सेवा से जुड़ा है. यह दिल्ली से 310 किलोमीटर पर है. काठगोदाम को द गेटवे ऑफ कुमाऊं हिल्स के नाम से भी जाना
जाता है. यह नैनीताल से 35 किलोमीटर की दूरी पर है. यह दिल्ली, देहरादून, लखनऊ कोलकाता से ट्रेन
मार्ग से जुड़ा है. यह नैनीताल से सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन है. ट्रेन से पहुंचने
के बाद उससे आगे का सफर टैक्सी या बस से कर सकते हैं.
सड़क मार्ग
दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, कानपुर जैसे शहरों
के लिए सीधी बस सेवा है. प्राइवेट बसों के साथ- साथ यहां उत्तराखंड यूपी, हरियाणा और राजस्थान
रोडवेज की भी अच्छी सर्विस है.
वायु मार्ग
नैनीताल पहुंचने के लिए
सबसे नजदीकी एयरपोर्ट पतंनगर हवाई अड्डा है जिसके लिए नई दिल्ली से सीधी प्लाइट है.
पतंनगर पहुंचने के बाद उससे आगे का सफर टैक्सी या बस से कर सकते हैं.

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